गोहाना उपमंडल परिसर में आयोजित समाधान शिविर के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते एसडीएम।
सोनीपत जिले के गोहाना उपमंडल में आयोजित समाधान शिविर गोहाना में प्रशासन ने शिकायतों के निस्तारण को लेकर स्पष्ट और कड़े संकेत दिए हैं। सोमवार को उपमंडलीय परिसर में आयोजित शिविर के दौरान अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे एसडीएम प्रवेश कादियान ने अधिकारियों को सीधे निर्देश दिए कि वे स्वयं उपस्थित रहकर जन शिकायतों का मौके पर समाधान सुनिश्चित करें।उन्होंने कहा कि समाधान शिविर गोहाना केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों को एक मंच पर विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध कराने का माध्यम है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लंबित शिकायतों पर विशेष जोर
एसडीएम ने स्पष्ट किया कि पहले से लंबित शिकायतों को भी प्राथमिकता के आधार पर तय समयसीमा में निपटाया जाए। उन्होंने विभागीय समन्वय को मजबूत करने पर बल देते हुए कहा कि कई बार मामलों में देरी केवल संवाद की कमी से होती है, जिसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए।अधिकारियों को चेतावनी दी गई कि यदि शिकायतों के समाधान में कोताही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की यह सख्ती संकेत देती है कि जनसुनवाई को अब परिणामोन्मुखी बनाया जा रहा है।
विभिन्न विभागों को मौके पर निर्देश
शिविर के दौरान कई विशिष्ट शिकायतों पर विभागवार निर्देश भी जारी किए गए। गांव बिचपड़ी के एक नागरिक द्वारा फैमिली आईडी में भूमि अधिक दर्ज होने की शिकायत पर तहसीलदार गोहाना और संबंधित तकनीकी शाखा को आवश्यक जांच व सुधार के निर्देश दिए गए।गांव कथूरा से पंचायती भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत को गंभीर मानते हुए संबंधित विकास खंड अधिकारी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वहीं, गांव जसिया की एक महिला द्वारा इंतकाल दर्ज कराने के आवेदन पर नायब तहसीलदार को प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के लिए कहा गया।इन मामलों से स्पष्ट है कि समाधान शिविर गोहाना में प्रशासनिक तंत्र मौके पर निर्णय लेकर नागरिकों को राहत देने की दिशा में सक्रिय दिखाई दिया।
समाधान शिविर का उद्देश्य और प्रशासनिक दृष्टिकोण
समाधान शिविरों की परिकल्पना का मूल उद्देश्य यह है कि नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। एक ही स्थान पर राजस्व, पंचायत, बिजली, लोक निर्माण, मार्केट कमेटी और अन्य विभागों की मौजूदगी से शिकायतों का त्वरित निस्तारण संभव हो सके।एसडीएम प्रवेश कादियान ने कहा कि प्रशासन आमजन की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है और हर अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरे। उन्होंने दोहराया कि उपमंडल स्तर के सभी अधिकारी समाधान शिविर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना सुनिश्चित करें, ताकि निर्णय लेने में अनावश्यक देरी न हो।
प्रशासनिक उपस्थिति और जवाबदेही
शिविर में राजस्व, पंचायत, विद्युत, लोक निर्माण और मार्केट कमेटी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। यह उपस्थिति दर्शाती है कि समाधान शिविर को समन्वित प्रशासनिक पहल के रूप में लिया जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की बैठकों में नियमित समीक्षा और जवाबदेही तय की जाए, तो स्थानीय स्तर पर कई विवाद प्रारंभिक स्तर पर ही सुलझ सकते हैं। इससे न्यायिक और प्रशासनिक बोझ भी कम होगा।
जन अपेक्षाएं और चुनौतियां
हालांकि समाधान शिविरों की अवधारणा सकारात्मक है, लेकिन उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि शिकायतों का वास्तविक और स्थायी समाधान हो। केवल आवेदन प्राप्त कर लेना या आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है।गोहाना क्षेत्र में भूमि विवाद, पारिवारिक पहचान दस्तावेजों में त्रुटियां, अवैध कब्जे और राजस्व संबंधी प्रक्रियाएं प्रमुख शिकायतों में शामिल रही हैं। इन मामलों में पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई ही प्रशासन की विश्वसनीयता तय करेगी।
क्या समाधान शिविर प्रणाली को और मजबूत करने की जरूरत?
विशेषज्ञों के अनुसार, समाधान शिविरों में प्राप्त शिकायतों का डिजिटल रिकॉर्ड, सार्वजनिक डैशबोर्ड और समयसीमा आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की जाए तो पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों में सुधार होगा।यदि प्रत्येक शिकायत की स्थिति ऑनलाइन उपलब्ध हो और तय समय में समाधान अनिवार्य किया जाए, तो नागरिकों का विश्वास और अधिक मजबूत हो सकता है।
इस खबर का असर क्या होगा?
समाधान शिविर गोहाना में दी गई सख्त प्रशासनिक चेतावनी का सीधा असर अधिकारियों की कार्यशैली पर पड़ सकता है। लंबित मामलों की समीक्षा तेज होगी और विभागों के बीच समन्वय बढ़ने की संभावना है।आम नागरिकों के लिए यह संदेश स्पष्ट है कि उनकी शिकायतों को अब प्राथमिकता दी जा रही है। यदि निर्देशों का पालन प्रभावी ढंग से हुआ, तो स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे विवादों का त्वरित समाधान संभव होगा, जिससे प्रशासन पर भरोसा मजबूत हो सकता है।
निष्कर्ष
समाधान शिविर गोहाना में प्रशासन की सक्रियता यह संकेत देती है कि जनसुनवाई को केवल औपचारिक प्रक्रिया न मानकर परिणाम आधारित तंत्र के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिए गए निर्देशों का अनुपालन किस हद तक होता है और लंबित शिकायतों के निस्तारण में कितनी तेजी आती है। यदि यह पहल निरंतरता के साथ जारी रहती है, तो स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था अधिक जवाबदेह और प्रभावी बन सकती है।