डीएलएसए सोनीपत फरवरी में गांवों में बाल विवाह और डिजिटल सुरक्षा पर जागरूकता शिविर आयोजित करेगा।
फरवरी माह में गांव-गांव पहुंचेंगे डीएलएसए के जागरूकता शिविर
सोनीपत जिले में सामाजिक जागरूकता को मजबूत करने की दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। डीएलएसए सचिव प्रचेता सिंह ने बताया कि फरवरी माह के दौरान जिले के विभिन्न गांवों में विशेष जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य “बाल विवाह मुक्त भारत” के संकल्प को मजबूत करना और डिजिटल दुनिया में सुरक्षित व्यवहार के प्रति लोगों को सजग बनाना है।
प्रशासन का मानना है कि कानून तभी प्रभावी होता है, जब समाज उसके उद्देश्य और महत्व को समझे। इसी सोच के तहत डीएलएसए द्वारा यह अभियान चलाया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी कानूनी जानकारी और जागरूकता पहुंच सके।
बाल विवाह रोकने पर विशेष फोकस
डीएलएसए सचिव के अनुसार, शिविरों में बाल विवाह से जुड़े कानूनों, इसके दुष्परिणामों और सामाजिक प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बाल विवाह न केवल बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा को प्रभावित करता है, बल्कि उनके भविष्य को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है। इसके बावजूद, कुछ क्षेत्रों में यह प्रथा आज भी देखने को मिलती है।
शिविरों के माध्यम से लोगों को यह बताया जाएगा कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसकी जानकारी होने पर नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें। जिला प्रशासन का उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई से पहले जागरूकता के जरिए इस कुप्रथा को समाप्त करना है।
डिजिटल वर्ल्ड में सुरक्षित रहने की सीख
इन जागरूकता शिविरों का दूसरा अहम विषय डिजिटल सुरक्षा है। “डिजिटल वर्ल्ड का सुरक्षित प्रबंधन – साझा करने से पहले सोचे” विषय पर विशेषज्ञ ग्रामीणों को इंटरनेट, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के सुरक्षित उपयोग के बारे में जानकारी देंगे।
आज के समय में साइबर ठगी, फर्जी कॉल, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डेटा चोरी जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। शिविरों में बताया जाएगा कि कैसे अनजान लिंक, कॉल या संदेश से बचा जाए और अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखा जाए।
फरवरी में इन गांवों में होंगे शिविर
डीएलएसए द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार फरवरी माह में जिले के कई गांवों में चरणबद्ध तरीके से शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें बादशाहपुर माछरी, बड़वासनी, दौदवा, गढ़ी हकीकत, गुहणा, हरसाना कलां, तिहाड़ कलां, हुल्लेड़ी, जाहरी, जाजी, जुंआ-2, ककरोई, करेवड़ी, खीजरपुर जटमाजरा, कुराड़ इब्राहिमपुर, हसनपुर, जगदीशपुर, जैनपुर, जाजल, झुंडपुर, चौहान जौशी, खटकड़, खेवड़ा, किशोरा, कमासपुर, असदपुर, अकबरपुर बारोटा, लड़सौली, बिंदरौली, छतेरा बहादुरपुर, दहीसरा, गढ़ीबाला, हलालपुर, जाखौली, जांटी कलां, जांटी खुर्द, जठेड़ी, झीझोंली, कतलूपुर और कामी जैसे गांव शामिल हैं।
प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक गांवों तक यह संदेश पहुंचे और ग्रामीण समुदाय सक्रिय रूप से इसमें भाग ले।
कई विभागों के विशेषज्ञ होंगे शामिल
इन शिविरों में केवल डीएलएसए ही नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ भी बतौर रिसोर्स पर्सन मौजूद रहेंगे। इनमें विधिक सहायता अधिवक्ता, जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी कार्यालय के प्रतिनिधि, पुलिस विभाग (साइबर क्राइम), महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
शिविरों के दौरान मानव तस्करी एवं व्यावसायिक यौन शोषण पीड़ित योजना-2015, नालसा हेल्पलाइन 15100 और निःशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी भी दी जाएगी, ताकि जरूरतमंद लोग समय पर मदद ले सकें।
कानूनी सहायता और हेल्पलाइन की जानकारी
डीएलएसए सचिव प्रचेता सिंह ने बताया कि बहुत से लोग अपने अधिकारों और उपलब्ध कानूनी सहायता से अनजान रहते हैं। इन शिविरों में यह समझाया जाएगा कि किसी भी कानूनी समस्या की स्थिति में निःशुल्क कानूनी सहायता कैसे प्राप्त की जा सकती है और किन परिस्थितियों में नालसा हेल्पलाइन का उपयोग किया जाए।
उन्होंने कहा कि यह पहल समाज के कमजोर वर्गों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित होगी।