सोनीपत जल प्रदूषण निरीक्षण अभियान में औद्योगिक इकाई की जांच करते अधिकारी
सोनीपत में बढ़ते जल प्रदूषण को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सोनीपत जल प्रदूषण निरीक्षण अभियान के तहत जिला प्रशासन और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संयुक्त रूप से औद्योगिक इकाइयों पर औचक निरीक्षण शुरू किया है। ड्रेन नंबर 6 और मुंगेशपुर ड्रेन के पानी की गुणवत्ता पर उठे सवालों के बाद यह कदम उठाया गया है।
जिला उपायुक्त सुशील सारवान के नेतृत्व में गठित आठ टीमों ने बुधवार को विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में एक साथ छापामार कार्रवाई की। प्रशासन का कहना है कि पर्यावरण मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सोनीपत जल प्रदूषण निरीक्षण अभियान: क्या है पूरा मामला
पिछले कुछ समय से जिले से गुजरने वाले प्रमुख ड्रेनों में पानी की गुणवत्ता खराब होने की शिकायतें मिल रही थीं। आशंका जताई जा रही थी कि कुछ उद्योग बिना उचित उपचार के अपशिष्ट जल को सीधे ड्रेनों में छोड़ रहे हैं। यह स्थिति न केवल स्थानीय जल स्रोतों बल्कि यमुना नदी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
इसी पृष्ठभूमि में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के क्षेत्रीय कार्यालय ने आठ संवेदनशील औद्योगिक पॉकेट चिन्हित किए। प्रशासन ने इन क्षेत्रों में एकदिवसीय विशेष निरीक्षण अभियान चलाने का निर्णय लिया, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
किन क्षेत्रों में हुई जांच
निरीक्षण टीमों ने नाथुपुर, अकबरपुर बरौटा, राठधना, बहालगढ़ रोड, कुंडली, मुरथल, लिवासपुर, रामनगर और खरखौदा सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा किया। प्रत्येक टीम में एचएसपीसीबी के फील्ड अधिकारी के साथ संबंधित विभागों के अधिकारी भी शामिल रहे।
विशेष ध्यान उन इकाइयों पर केंद्रित किया गया जो कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) से संबद्ध नहीं हैं और औद्योगिक क्षेत्रों के बाहरी जोन में संचालित हो रही हैं। इन इकाइयों में स्थापित एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कार्यप्रणाली की गहन जांच की गई।
जल नमूनों की वैज्ञानिक जांच
निरीक्षण के दौरान ईटीपी और एसटीपी के इनलेट तथा आउटलेट से जल के नमूने लिए गए। इन नमूनों को परीक्षण के लिए एचएसपीसीबी की फरीदाबाद स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
क्षेत्रीय अधिकारी अजय मलिक ने स्पष्ट किया कि यदि किसी इकाई के नमूने निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषित पाए गए, तो संबंधित उद्योग के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसमें जुर्माना, संचालन निलंबन या कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है।
प्रशासन की सख्त चेतावनी
उपायुक्त सुशील सारवान ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी उद्योग को नियमों की अनदेखी की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने उद्योग संचालकों से अपील की कि वे अपने ईटीपी और एसटीपी का नियमित संचालन सुनिश्चित करें और उपचारित जल का पुनः उपयोग उत्पादन प्रक्रिया में करें।
यह कार्रवाई स्पेशल एनवायरनमेंट सर्विलांस टास्क फोर्स (एसईएसटीएफ) की सिफारिशों के आधार पर की गई है। टास्क फोर्स का उद्देश्य अवैध डिस्चार्ज पर रोक लगाना और जिले के जल स्रोतों की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
पृष्ठभूमि: क्यों बढ़ी चिंता
सोनीपत औद्योगिक दृष्टि से तेजी से विकसित हो रहा जिला है। बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों के साथ पर्यावरणीय चुनौतियां भी सामने आई हैं। यदि अपशिष्ट जल का समुचित उपचार नहीं किया जाता, तो इसका असर कृषि, भूजल और मानव स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
ड्रेन नंबर 6 और मुंगेशपुर ड्रेन के माध्यम से निकलने वाला पानी अंततः बड़े जल स्रोतों से जुड़ता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर की गई लापरवाही व्यापक पर्यावरणीय संकट का कारण बन सकती है।
आगे की रणनीति
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यह केवल एक दिन का अभियान नहीं रहेगा। भविष्य में भी समय-समय पर औचक निरीक्षण जारी रहेंगे। इसके अलावा, अतिरिक्त फील्ड अधिकारियों की तैनाती कर निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई से उद्योगों में जवाबदेही बढ़ेगी और स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।