नगराधीश डॉ. अनमोल POSH अधिनियम पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए
सोनीपत में POSH अधिनियम पर जिला स्तरीय विशेष प्रशिक्षण
सोनीपत, 28 जनवरी। कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण प्रदान करना किसी एक संस्था या अधिकारी की नहीं, बल्कि सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह बात नगराधीश डॉ. अनमोल ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित जिला स्तरीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कही। यह कार्यक्रम लघु सचिवालय में महिलाओं पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आयोजित किया गया।
कानून को व्यवहार में उतारना सबसे जरूरी
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए नगराधीश डॉ. अनमोल ने कहा कि POSH अधिनियम केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा का मजबूत माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कानून की जानकारी केवल कागजों तक सीमित रह जाए, तो उसका उद्देश्य पूरा नहीं होता। सभी सरकारी और निजी संस्थानों को इसे व्यवहार में लागू करना होगा, ताकि किसी भी महिला कर्मचारी को उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।
सुरक्षित कार्यस्थल की अवधारणा पर विस्तृत चर्चा
प्रशिक्षण सत्र के दौरान विषय विशेषज्ञ समीक्षा ने महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल की अवधारणा को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक, मौखिक और व्यवहारिक रूप में भी हो सकता है। ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, समय-सीमा और गोपनीयता बनाए रखने के प्रावधानों पर विशेष जोर दिया गया।
आंतरिक शिकायत समिति की भूमिका
विशेषज्ञों ने आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और स्थानीय शिकायत समिति (LCC) की भूमिका को विस्तार से समझाया। बताया गया कि प्रत्येक विभाग में ICC का गठन अनिवार्य है और यह समिति निष्पक्ष, संवेदनशील और समयबद्ध तरीके से शिकायतों का निपटारा करने के लिए जिम्मेदार होती है। समिति के सदस्यों को कानून की पूरी जानकारी होना आवश्यक है, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।
सख्त कानूनी प्रावधान और दंड
प्रशिक्षण में यह भी स्पष्ट किया गया कि महिलाओं के प्रति यौन उत्पीड़न एक गंभीर अपराध है। POSH अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर न केवल विभागीय कार्रवाई होती है, बल्कि कानूनी दंड का भी प्रावधान है। इससे कार्यस्थल पर अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
शी बॉक्स पोर्टल की जानकारी
महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी प्रवीन कुमारी ने शी बॉक्स पोर्टल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जिले के सभी विभागों की आंतरिक शिकायत समितियों और स्थानीय शिकायत समिति का विवरण इस पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। साथ ही, त्रैमासिक और वार्षिक रिपोर्ट भी नियमित रूप से पोर्टल पर दर्ज की जाती हैं, जिससे निगरानी और पारदर्शिता बनी रहती है।
विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी
इस जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्थानीय शिकायत समिति के सदस्य, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी, वन स्टॉप सेंटर, जिला बाल संरक्षण अधिकारी और विभिन्न विभागों की ICC के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने कानून से जुड़े व्यावहारिक सवाल पूछे और विशेषज्ञों ने उनके समाधान दिए।
प्रशासन, पुलिस और सामाजिक संगठनों की मौजूदगी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डिप्टी सिविल सर्जन योगेश गोयल, सोनीपत महिला थाना प्रभारी कविता, सीडीपीओ गीता गहलावत, रेडक्रॉस की पूर्व सचिव सरोज बाला, नीलम रंगा, जसवंती, वेटरनरी सर्जन डॉ. संजय, सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण वर्मा सहित कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आपसी समन्वय की आवश्यकता पर सहमति जताई।