एसएमडीए और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध कॉलोनियों पर की गई कार्रवाई
सोनीपत जिले में अनियोजित शहरी विकास और अवैध निर्माणों पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण (एसएमडीए) ने खरखौदा क्षेत्र के गांव फिरोजपुर बांगर और हलालपुर में राजस्व भूमि पर विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों और निर्माणों को ध्वस्त किया। यह कार्रवाई उपायुक्त सुशील सारवान के निर्देशों के तहत की गई, जिसका उद्देश्य अवैध निर्माणों को प्रारंभिक चरण में ही रोकना है।
जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) नीलम शर्मा ने बताया कि जिले में नियंत्रित क्षेत्रों में बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि भविष्य में नागरिकों के लिए गंभीर समस्याएं भी पैदा कर सकते हैं। इसी कारण एसएमडीए द्वारा नियमित रूप से निगरानी कर कार्रवाई की जा रही है।
फिरोजपुर बांगर में अवैध कॉलोनी पर बड़ी कार्रवाई
एसएमडीए की टीम ने गुरुवार को खरखौदा क्षेत्र के गांव फिरोजपुर बांगर में राजस्व भूमि पर विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी को चिन्हित कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। एक स्थान पर लगभग 1.5 एकड़ क्षेत्र में बनाई गई इंटरलॉकिंग टाइल्स की सड़क और दो निर्माणाधीन औद्योगिक भवनों को तोड़ा गया।
इसके अलावा, दूसरे स्थान पर दो निर्माणाधीन औद्योगिक शेड और लगभग तीन एकड़ क्षेत्र में फैले अवैध सड़क नेटवर्क को भी ध्वस्त किया गया। अधिकारियों के अनुसार, ये सभी निर्माण बिना किसी वैधानिक अनुमति के किए जा रहे थे और नियंत्रित क्षेत्र अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन थे।
हलालपुर में अवैध लेबर क्वार्टर और दुकानें भी गिरीं
कार्रवाई केवल फिरोजपुर बांगर तक सीमित नहीं रही। गांव हलालपुर में भी एसएमडीए की टीम ने अवैध रूप से बनाए जा रहे चार लेबर क्वार्टर और तीन दुकानों को ध्वस्त किया। ये निर्माण भी बिना स्वीकृति के किए जा रहे थे और भविष्य में अवैध बस्तियों का रूप ले सकते थे।
डीटीपी नीलम शर्मा ने बताया कि यदि प्रारंभिक चरण में ऐसे निर्माणों को नहीं रोका जाए, तो बाद में इन्हें हटाना और अधिक कठिन हो जाता है। इससे न केवल सरकारी भूमि का दुरुपयोग होता है, बल्कि कानून व्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर भी दबाव बढ़ता है।
अवैध कॉलोनियों से आमजन को होने वाला नुकसान
कार्रवाई के दौरान डीटीपी ने आम नागरिकों से विशेष अपील की कि वे अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने से बचें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी कॉलोनियों में सरकार द्वारा सड़क, पानी, सीवरेज, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं।
उन्होंने कहा कि अवैध कॉलोनियों में निवेश करने से लोगों की जीवन भर की कमाई जोखिम में पड़ सकती है। कई मामलों में बाद में ऐसे निर्माणों को गिरा दिया जाता है, जिससे खरीदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
प्लॉट खरीदने से पहले जांच जरूरी
डीटीपी नीलम शर्मा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति प्लॉट या संपत्ति खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करे कि संबंधित कॉलोनी विधिवत स्वीकृत है या नहीं। इसके लिए नागरिक एसएमडीए या नगर योजनाकार कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि नियंत्रित क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण शुरू करने से पहले एसएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति किए गए निर्माण को किसी भी समय नियंत्रित क्षेत्र अधिनियम के तहत गिराया जा सकता है।
प्रशासन की सख्ती के पीछे क्या है वजह
सोनीपत तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर से सटे होने के कारण यहां भूमि की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग अवैध कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं, जिससे भविष्य में यातायात, जल निकासी, सीवरेज और पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रशासन का मानना है कि समय रहते अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने से नियोजित विकास को बढ़ावा मिलेगा और नागरिकों को सुरक्षित व बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई
यह पूरी ध्वस्तीकरण कार्रवाई ड्यूटी मजिस्ट्रेट पंचायती राज विभाग के एसडीओ अमित कुमार की निगरानी में की गई। इस दौरान एसएमडीए की इंफोर्समेंट टीम और पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और कार्रवाई शांतिपूर्वक संपन्न हो सके।
अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी इसी तरह की नियमित कार्रवाइयां जारी रहेंगी और अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।