सोनीपत में युवा आपदा मित्र योजना के तहत युवाओं को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देते विशेषज्ञ
सोनीपत, 05 फरवरी।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी युवा आपदा मित्र योजना के अंतर्गत सोनीपत जिले के बीट्स मोहाना क्षेत्र में आयोजित सात दिवसीय गहन आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया। यह कार्यक्रम जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में समुदाय स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम युवाओं को तैयार करना रहा।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के परियोजना अधिकारी विनित कादियान ने जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को संभावित प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं से निपटने के लिए व्यावहारिक, तकनीकी और मानसिक रूप से मजबूत बनाने पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित युवा आपदा के समय पहले उत्तरदाता के रूप में कार्य कर सकेंगे और प्रशासनिक व पेशेवर सहायता के पहुंचने तक राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर पाएंगे।
आपदा से पहले तैयारी पर रहा विशेष जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि आपदाएं अचानक आती हैं, लेकिन यदि पहले से तैयारी हो तो जनहानि और संपत्ति के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी सोच के तहत युवाओं को जोखिम मूल्यांकन, स्थिति की त्वरित समझ और सुरक्षित निर्णय लेने के कौशल सिखाए गए।
विनित कादियान ने अपने संबोधन में कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के जागरूक युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही प्रभावी आपदा प्रबंधन संभव हो सकता है। युवा आपदा मित्र योजना इसी दिशा में एक ठोस पहल है।
विशेषज्ञ एजेंसियों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
सात दिनों तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में हरियाणा राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), जिला अग्निशमन विभाग, रेडक्रॉस, स्वास्थ्य विभाग, होम गार्ड तथा नागरिक सुरक्षा विभाग की विशेषज्ञ टीमों ने हिस्सा लिया। इन टीमों ने वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण देकर युवाओं को आपदा से जुड़ी जमीनी चुनौतियों से अवगत कराया।
प्रशिक्षण पूरी तरह व्यावहारिक और सहभागितापूर्ण रहा, ताकि स्वयंसेवक वास्तविक आपदा के समय बिना घबराहट के प्रभावी तरीके से कार्य कर सकें।
प्रशिक्षण की प्रमुख गतिविधियां
प्रशिक्षण के दौरान स्वयंसेवकों को खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) की आधुनिक तकनीकों का अभ्यास कराया गया। इसमें ढही हुई इमारतों, संकरे स्थानों और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों से पीड़ितों को सुरक्षित बाहर निकालने की विधियां शामिल रहीं।
इसके साथ ही प्राथमिक उपचार और सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) पर गहन व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में घावों का उपचार, फ्रैक्चर को स्थिर करना, रक्तस्राव रोकने की तकनीक और आपातकालीन स्थिति में जीवन रक्षक उपायों की जानकारी दी गई।
रस्सी बचाव और सुरक्षित निकासी का अभ्यास
प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रस्सी बचाव और सुरक्षित निकासी तकनीकों पर केंद्रित रहा। बाढ़, आग, ऊंचाई से गिरने या बहुमंजिला इमारतों से जुड़े हादसों के दौरान तात्कालिक संसाधनों और रस्सियों के माध्यम से सुरक्षित बचाव कैसे किया जाए, इसका अभ्यास कराया गया।
इसके अतिरिक्त आपदा तैयारी से जुड़े सैद्धांतिक सत्रों में खतरे की पहचान, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) का सही उपयोग और जिला प्रशासन व अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया।
प्रमाण पत्र और भविष्य की तैयारी
प्रशिक्षण के समापन पर सभी स्वयंसेवकों को राज्य स्तर के प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में इन प्रशिक्षित युवाओं को आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए आवश्यक आपातकालीन प्रतिक्रिया किट भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें बुनियादी सुरक्षा और बचाव उपकरण शामिल होंगे।
यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जरूरत पड़ने पर ये युवा तुरंत सक्रिय होकर प्रशासन के साथ समन्वय में राहत और बचाव कार्य कर सकें।
आपदा-प्रतिरोधी समाज की ओर कदम
अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से समाज में आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर मजबूत प्रतिक्रिया तंत्र विकसित होगा। प्रशिक्षित युवा न केवल स्वयं सुरक्षित रहेंगे, बल्कि दूसरों की जान बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।