सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प महोत्सव में विभिन्न पवेलियनों का अवलोकन करते छात्र।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प महोत्सव के माध्यम से युवाओं को भारतीय और वैश्विक सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की एक संगठित पहल सामने आई है। हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा के प्रयासों से गोहाना क्षेत्र के विद्यार्थियों को मेले का शैक्षणिक भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि वे विविध सांस्कृतिक परंपराओं को नजदीक से समझ सकें।
यह पहल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को कला, हस्तशिल्प और परंपराओं के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में एक संरचित प्रयास के रूप में देखी जा रही है। प्रतिदिन अलग-अलग विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को बसों के माध्यम से मेले तक पहुंचाया जा रहा है।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प महोत्सव में युवाओं की भागीदारी
अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में आयोजित 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प महोत्सव देश-विदेश के कलाकारों और शिल्पकारों का बड़ा मंच बन चुका है। इस वर्ष महोत्सव में पार्टनर नेशन और थीम स्टेट की अवधारणा के तहत विभिन्न संस्कृतियों की झलक प्रस्तुत की जा रही है।
गोहाना विधानसभा क्षेत्र से सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को योजनाबद्ध तरीके से मेले में ले जाया जा रहा है। इसका उद्देश्य है कि युवा विविध राज्यों की हस्तशिल्प, हथकरघा और बुनकरी परंपराओं को प्रत्यक्ष रूप से देखें और उनसे सीखें।
सांस्कृतिक अनुभव और शैक्षणिक दृष्टिकोण
हाल ही में राजकीय कन्या महाविद्यालय गोहाना और पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गढ़ी उजाले खां के विद्यार्थियों ने महोत्सव का दौरा किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों और विदेशी पवेलियनों में प्रदर्शित कला कृतियों का अवलोकन किया।
विद्यार्थियों ने मुख्य चौपाल और छोटी चौपाल पर आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। क्षेत्रीय कलाकारों के साथ-साथ विदेशी दलों की प्रस्तुतियों ने उन्हें विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से परिचित कराया। स्वयं सहायता समूहों और केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी अवलोकन किया गया, जिससे युवाओं को उद्यमिता और पारंपरिक कौशल के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी मिली।
पर्यटन और सांस्कृतिक कूटनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सांस्कृतिक कूटनीति का भी माध्यम बनते हैं। विभिन्न देशों और राज्यों की सहभागिता से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा मिलता है।
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि युवाओं को संस्कृति से जोड़ना भविष्य के लिए निवेश है। उनके अनुसार, मेले का अनुभव विद्यार्थियों को न केवल कला की समझ देता है, बल्कि विविधता में एकता की भावना भी मजबूत करता है। विद्यार्थियों के आवागमन और भोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर समन्वित की गई है।
इस खबर का असर क्या होगा?
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प महोत्सव में युवाओं की संगठित भागीदारी से सांस्कृतिक शिक्षा को व्यावहारिक आयाम मिलेगा। इससे विद्यार्थियों में पारंपरिक कलाओं के प्रति सम्मान और समझ विकसित हो सकती है।
दीर्घकाल में यह पहल युवाओं को हस्तशिल्प, डिजाइन और सांस्कृतिक उद्यमिता जैसे क्षेत्रों की ओर प्रेरित कर सकती है। साथ ही, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
निष्कर्ष
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प महोत्सव केवल एक मेला नहीं, बल्कि सांस्कृतिक सीख का जीवंत मंच है। यदि ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहे, तो नई पीढ़ी अपनी जड़ों से अधिक मजबूती से जुड़ सकेगी और वैश्विक सांस्कृतिक परिदृश्य को बेहतर ढंग से समझ पाएगी।