पलवल में जेन-जी और विकसित भारत पर आयोजित विचार-विमर्श कार्यक्रम
पलवल में जेन-जी और विकसित भारत पर सार्थक संवाद
हरियाणा के पलवल स्थित श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय (एसवीएसयू) में बुधवार को ‘जेन-जी कनेक्ट फॉर विकसित भारत @2047’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट और एसवीएसयू के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य युवाओं, विशेषकर जेन-जी पीढ़ी को भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों से जोड़ना और उनके सामाजिक, नैतिक तथा राष्ट्रीय दायित्वों पर चर्चा करना रहा।
भारत का जेन-जी दुनिया से अलग: डॉ. बिनय कुमार
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक डॉ. बिनय कुमार सिंह ने भारत की जेन-जी पीढ़ी की विशिष्ट पहचान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का जेन-जी वैश्विक स्तर पर अलग सोच और संस्कारों के साथ आगे बढ़ रहा है। यह पीढ़ी केवल उपभोग या दिखावे में विश्वास नहीं रखती, बल्कि रचनात्मकता, संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव को महत्व देती है।
डॉ. बिनय कुमार सिंह ने कहा कि भारत ने विश्व को ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की अवधारणा दी है और यही विचार जेन-जी के आचरण में भी झलकता है। उनके अनुसार, भारत का युवा वर्ग हजारों वर्षों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक बोध के साथ आगे बढ़ रहा है, जो उसे अन्य देशों की युवा पीढ़ियों से अलग बनाता है। उन्होंने जेन-जी को राष्ट्र की सॉफ्ट पावर बताते हुए कहा कि यही पीढ़ी भारत की वैश्विक पहचान को नई दिशा देगी।
युवाओं से ड्रग्स से दूर रहने की अपील
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पलवल के उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने युवाओं से नशे और ड्रग्स से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है जब युवा स्वस्थ, सजग और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध होंगे। डॉ. वशिष्ठ ने जेन-जी को विकसित भारत की नींव बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में देश की प्रगति का दायित्व इसी पीढ़ी के कंधों पर होगा।
उपायुक्त ने युवाओं को सलाह दी कि वे अपने जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें और अनुशासन के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने सुरक्षा, स्वास्थ्य और करियर को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि आत्मविश्वासी और जागरूक युवा ही समाज को सकारात्मक दिशा दे सकते हैं।
शिक्षा, अनुशासन और कौशल पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एसवीएसयू के कुलपति प्रोफेसर दिनेश कुमार ने कहा कि जेन-जी देश और समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने इस शक्ति को सही दिशा देने के लिए समय प्रबंधन, अनुशासन और कौशल विकास को अत्यंत आवश्यक बताया। प्रोफेसर दिनेश कुमार ने जापान जैसे देशों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार अनुशासन और कौशल आधारित शिक्षा किसी भी राष्ट्र को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बना सकती है।
उन्होंने कहा कि आज की जेन-जी को ही भविष्य का संसार संभालना है, इसलिए उन्हें उद्यमिता, नवाचार और व्यावसायिक कौशल पर विशेष ध्यान देना होगा। विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे कार्यक्रम युवाओं को व्यवहारिक सोच और राष्ट्रीय दृष्टिकोण प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
विकसित भारत के लक्ष्य में जेन-जी की भागीदारी
आईपीपीआरएसडी के अध्यक्ष और कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सुनील भारद्वाज ने कहा कि प्रत्येक पीढ़ी के सामने अलग-अलग चुनौतियां होती हैं। वर्तमान समय में जेन-जी के सामने तकनीक, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की चुनौतियां हैं, लेकिन यही पीढ़ी विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की क्षमता भी रखती है।
सुनील भारद्वाज ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि जेन-जी की ऊर्जा, विचार और नवाचार ही भारत को 2047 तक एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाएंगे। उन्होंने युवाओं में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित किया।
विश्वविद्यालय की भूमिका और युवाओं की जिम्मेदारी
कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव प्रोफेसर ज्योति राणा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे विकसित भारत के लक्ष्य में रचनात्मक भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला भी हैं।
कार्यक्रम का मंच संचालन संदीप द्वारा किया गया, जिन्होंने युवाओं को पूरे समय सक्रिय और जुड़ा रखा। इस अवसर पर इरा की निदेशक चंचल भारद्वाज, युवा कल्याण निदेशक अनिल कौशिक, डिप्टी डीएसडब्ल्यू डॉ. दलीप रैना, प्राचार्य सतेंद्र सौरोत, डॉ. सोहन लाल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।