जम्मू-कश्मीर में मत्स्य पालन को अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, जम्मू (SKUAST-J) ने किसानों और ग्रामीण युवाओं को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए एक विशेष वैज्ञानिक मत्स्य पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।

इस पहल का उद्देश्य मछली उत्पादन को बढ़ाना, उत्पादन लागत कम करना और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के बारे में जानकारी देना था। कार्यक्रम में किसानों, ग्रामीण युवाओं और महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और आधुनिक फिश फीड व पालन तकनीकों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की।
वैज्ञानिक मत्स्य पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य
SKUAST-J के मत्स्य विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य मत्स्य किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों से परिचित कराना था। यह कार्यक्रम होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम (HADP) के तहत संचालित परियोजना “टेक्नोलॉजिकल इंटरवेंशन्स फॉर फिश सीड एंड ट्राउट प्रोडक्शन” से जुड़ा हुआ था।इस पहल में कम लागत वाले फिश फीड के विकास और उसके उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मछली पालन में वैज्ञानिक फीड और पोषण प्रबंधन अपनाया जाए तो उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
इस कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.एन. त्रिपाठी के नेतृत्व और अनुसंधान निदेशक प्रो. सुशील कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया।
विभिन्न जिलों में आयोजित हुए प्रशिक्षण सत्र
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में आयोजित किया गया। इनमें रामबन, कठुआ और सांबा जैसे क्षेत्र शामिल थे। इन कार्यक्रमों के आयोजन में संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक मत्स्य पालन से जुड़ी तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसमें मछली के लिए संतुलित आहार, फीड तैयार करने की प्रक्रिया और उत्पादन बढ़ाने के तरीके शामिल थे।
आधुनिक फिश फीड और पोषण प्रबंधन पर जोर
कार्यक्रम के समन्वयक और प्रमुख अन्वेषक डॉ. अखिल गुप्ता ने बताया कि SKUAST-J का फिश न्यूट्रिशन रिसर्च लैब स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर पोषक तत्वों से भरपूर फिश फीड विकसित करने पर काम कर रहा है।उन्होंने बताया कि इस शोध का उद्देश्य आयातित फिश फीड पर निर्भरता कम करना और स्थानीय स्तर पर सस्ती एवं प्रभावी फीड उपलब्ध कराना है।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, वैज्ञानिक रूप से संतुलित आहार का उपयोग करने से मछलियों की वृद्धि दर बेहतर होती है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
ट्राउट और कार्प मछली उत्पादन बढ़ाने पर चर्चा
प्रशिक्षण सत्रों में ट्राउट और कार्प मछलियों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई।विशेषज्ञों ने बताया कि सही फीड और उचित पोषण प्रबंधन अपनाकर उत्पादन में काफी सुधार किया जा सकता है। किसानों को यह भी बताया गया कि फ्लोटिंग पेललेटेड फिश फीड का उपयोग करने से मछलियों की वृद्धि और फीड कन्वर्जन रेशियो बेहतर होता है।प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक रूप से तैयार किए गए फ्लोटिंग पेललेटेड फिश फीड भी वितरित किए गए ताकि वे इसकी गुणवत्ता और उपयोग को समझ सकें।
वैज्ञानिकों ने साझा किया शोध और तकनीकी अनुभव
कार्यक्रम के दौरान कई विशेषज्ञों ने मत्स्य पालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी।कृषि विज्ञान केंद्र रामबन के प्रभारी डॉ. राज कुमार, कठुआ के डॉ. विशाल महाजन और सांबा के डॉ. संजय खजूरिया ने मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीकों और बेहतर फीडिंग रणनीतियों पर प्रकाश डाला।
वहीं, HADP परियोजना की समन्वयक डॉ. सहर मसूद ने ऑनलाइन व्याख्यान के माध्यम से गुणवत्ता युक्त फिश सीड की पहचान और चयन के बारे में जानकारी दी।इसके अलावा मत्स्य वैज्ञानिकों ने कार्प और ट्राउट मछली उत्पादन की वर्तमान स्थिति, मछली पालन की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की।
किसानों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा व्यावहारिक प्रशिक्षण था। इसमें किसानों को पेललेटेड फिश फीड तैयार करने की प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन दिखाया गया।इन सत्रों के माध्यम से किसानों को यह समझाया गया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि अपशिष्ट और अन्य संसाधनों का उपयोग कर कम लागत में फिश फीड तैयार किया जा सकता है।
मत्स्य पालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किसानों ने वैज्ञानिकों के साथ खुलकर बातचीत की और अपने अनुभव तथा चुनौतियों को साझा किया।किसानों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं और इससे मत्स्य पालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।
निष्कर्ष: वैज्ञानिक मत्स्य पालन से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता
विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक मत्स्य पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसे प्रयास जम्मू-कश्मीर में मत्स्य क्षेत्र को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
यदि किसानों को लगातार प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो इससे न केवल मछली उत्पादन बढ़ेगा बल्कि ग्रामीण समुदायों की आय और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।