
Image Source : DIPRO Government Of Haryana
दिल्ली में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के बाद हुई कार्रवाई पर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं।दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं का कहना है कि युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे से जुड़ा मुद्दा है, जिसे केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। इसी सिलसिले में पार्टी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल उपराज्यपाल से मिला और ज्ञापन सौंपा।
युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर कांग्रेस की आपत्ति
नई दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उपराज्यपाल से मुलाकात कर विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए युवाओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों पर चिंता जताई। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने किया, जबकि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष और सांसद अजय माकन भी मौजूद रहे।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदर्शन प्रतीकात्मक और राजनीतिक प्रकृति का था। उनके अनुसार, गिरफ्तार किए गए युवाओं पर न तो किसी हिंसा का आरोप है और न ही सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का। ऐसे में गंभीर धाराओं के तहत की गई कार्रवाई को उन्होंने “अत्यधिक” बताया।अजय माकन ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाना संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि असहमति को अपराध की तरह पेश करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।
संवैधानिक अधिकारों का हवाला
प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) का उल्लेख किया, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार सुनिश्चित करते हैं। नेताओं का तर्क है कि यदि प्रदर्शन शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक हो, तो पुलिस कार्रवाई में संयम और अनुपातिकता बरतना आवश्यक है।देवेंद्र यादव ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है। यदि विरोध प्रदर्शनों को कठोर आपराधिक कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा, तो यह भविष्य में नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।उन्होंने यह भी बताया कि उपराज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल की बात ध्यानपूर्वक सुनी और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक औपचारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कुछ नीतिगत मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया था। पुलिस ने इसे अनुमति के बिना आयोजित प्रदर्शन मानते हुए कार्रवाई की।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजधानी में बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल कड़े होते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन को संवेदनशील माना जाता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या हर प्रतीकात्मक विरोध को कठोर कानूनी प्रावधानों के तहत लिया जाना चाहिए।दिल्ली की राजनीति में पहले भी ऐसे अवसर आए हैं जब विरोध प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद खड़े हुए। इस बार मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें युवाओं की भूमिका और राजनीतिक अभिव्यक्ति का सवाल जुड़ा हुआ है।

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पुलिस और प्रशासन की भूमिका
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने उपराज्यपाल से यह भी आग्रह किया कि चूंकि दिल्ली पुलिस उनके प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए निष्पक्षता और संतुलन सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि जांच की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए, लेकिन कार्रवाई में लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान भी होना चाहिए।विशेषज्ञों का मानना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि विरोध शांतिपूर्ण हो, तो कार्रवाई का स्वरूप संतुलित होना चाहिए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की राह
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह इसे व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाएगी। दूसरी ओर, सत्ताधारी दल की ओर से अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।राजधानी में आगामी राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। विशेषकर युवाओं की भागीदारी और राजनीतिक अभिव्यक्ति के अधिकार पर बहस तेज होने की संभावना है।
इस खबर का असर क्या होगा?
युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का असर केवल एक दल या घटना तक सीमित नहीं रह सकता। यह मामला लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पुलिस कार्रवाई की सीमा जैसे व्यापक सवालों को सामने लाता है।यदि जांच में संतुलन और पारदर्शिता दिखाई देती है, तो यह प्रशासनिक विश्वसनीयता को मजबूत करेगा। वहीं, यदि कार्रवाई को राजनीतिक दमन के रूप में देखा गया, तो इससे राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।
अंततः, युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का मुद्दा इस बात की परीक्षा भी है कि लोकतंत्र में असहमति को किस हद तक स्वीकार किया जाता है और कानून का प्रयोग किस संतुलन के साथ किया जाता है।