पलवल स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारी
पलवल स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर जिला प्रशासन और राज्य स्तरीय स्वच्छ भारत मिशन कार्यबल ने तैयारियां तेज कर दी हैं। समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया गया कि आगामी सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि जनभागीदारी को अभियान का केंद्र बनाना होगा।
पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कार्यकारी उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र ने की। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक, संस्थाएं और प्रशासन मिलकर कार्य करें तो पलवल स्वच्छता के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।
पलवल स्वच्छता सर्वेक्षण की रणनीति पर मंथन
बैठक में पलवल स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अभी से ठोस रणनीति बनाकर कार्य शुरू करें। कचरा संग्रहण, पृथक्करण और निस्तारण की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की गई तथा कमियों को दूर करने पर जोर दिया गया।
कार्यकारी उपाध्यक्ष ने कहा कि स्वच्छता केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को और अधिक प्रभावी बनाने, गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण को अनिवार्य रूप से लागू करने और सिंगल यूज प्लास्टिक पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
हरियाणा मॉडल और दावे
बैठक में यह दावा भी किया गया कि प्रदेश में कूड़े के बड़े ढेर अब दिखाई नहीं देते, जो निरंतर प्रयासों का परिणाम है। राज्य स्तर पर गठित टास्क फोर्स और निगरानी तंत्र की भूमिका को भी रेखांकित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि घर-घर से कचरा एकत्र करने की प्रणाली अब नियमित रूप से संचालित हो रही है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल संग्रहण पर्याप्त नहीं, बल्कि कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में स्थानीय निकायों को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।
नगर निकायों की भूमिका और समन्वय
नगर परिषद पलवल, नगर पालिका होडल और हथीन सहित सभी शहरी निकायों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए। प्रत्येक निकाय में नोडल अधिकारी नियुक्त करने, स्वच्छता सर्वेक्षण टूल किट का अध्ययन करने और सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
बैठक में डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था को मजबूत करने का भी सुझाव दिया गया, ताकि प्रगति की नियमित समीक्षा की जा सके। अधिकारियों ने फील्ड स्तर की चुनौतियों को साझा किया, जिनके समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने पर सहमति बनी।
जनभागीदारी और जागरूकता अभियान
पलवल स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन के लिए आईईसी गतिविधियों को बढ़ाने पर जोर दिया गया। स्कूलों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं को अभियान से जोड़ने की रणनीति पर चर्चा हुई। जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को स्वच्छता को दैनिक आदत बनाने के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य तय किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वेक्षण में नागरिकों की प्रतिक्रिया और सहभागिता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में जागरूकता कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन रैंकिंग सुधारने में सहायक हो सकता है।
इस खबर का असर क्या होगा?
पलवल स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर बनी रणनीति से स्थानीय निकायों की जवाबदेही बढ़ेगी। यदि तय दिशा-निर्देशों का पालन हुआ तो कचरा प्रबंधन व्यवस्था में सुधार और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल सकता है।
साथ ही, जनभागीदारी बढ़ने से स्वच्छता अभियान केवल प्रशासनिक प्रयास न रहकर सामुदायिक आंदोलन का रूप ले सकता है। इससे जिले की छवि और नागरिक स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
निष्कर्ष
पलवल स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर प्रशासन की सक्रियता यह दर्शाती है कि रैंकिंग सुधार अब प्राथमिकता बन चुकी है। हालांकि वास्तविक सफलता जमीनी क्रियान्वयन और नागरिक सहयोग पर निर्भर करेगी। यदि सामूहिक प्रयास निरंतर और अनुशासित रहे, तो पलवल स्वच्छता मानकों में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है।